सभा के उद्देश्य

१. दिल्ली के समस्त सनातन धर्म मंदिरों को संगठित निर्देश देना ।

२. सनातन धर्म की शास्त्रीय मर्यादाओं का सरंक्षण एवं संवर्धन करना ।

३. सनातन धर्म पर प्रहार करने वालों को समुचित उत्तर देते हुए सनातन धर्म के अनुकूल    जनमानस को तैयार करना ।

४. धार्मिक शिक्षा का प्रचार—प्रसार करना ।

५. शास्त्रीय परम्परा के अनुरूप धर्मप्रचारक के रूप मे आर्चकों को प्रशिक्षित करना ।

६. शास्त्र मर्यादानुकूल कर्मकाण्डी विध्दानों को तथा उपदेशकों को प्रशिक्षित करना ।

७. योग साधना एवम धार्मिक शिक्षा आधारित वाल व्यक्तिव विकास करना ।

८. सनातन धर्म से सम्बन्धित व्रत—पर्व त्योहारों को शास्त्रीय पद्धति से व्यक्तिगत एवं समूहिक रूप से आयोजित करना ।

९. दिल्ली प्रदेश की सनातन धर्म सभाओं को एक सूत्र में बाँधकर संगठित  करना तथा उसे एक प्रभावी मंच प्रदान करना ।

१०. भारतीय संस्कृति की रक्षा एवं प्रसार हेतु समान विचारों वाली संस्थाओं से तालमेल रखना ।

११. सनातनधर्म की शास्त्रीय मर्यादाओं एवं परम्पराओं का संरक्षण एवं प्रचार करना ।

१२. सनातनधर्म पर आधात करने वाले कर्यों का विरोध करना तथा जन मानस को तैयार करना ।

१३. प्राकृतिक आपदाओं में सहायता कार्य करना ।

१४. धार्मिक शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना ।

१५. सनातन परम्परा के अनुसार अर्चक तथा कर्मकाण्डी विदूानों के प्रशिक्षण की ववशता करना ।

१६. सनातन धर्म से संबंधित पर्वों एवं त्यौहार में एकरूपता लाना तथा प्रभावी ढंग से आयोजित करके दिशा निर्देश देना ।

१७. व्रतोत्त्सव पर्व दीपिका पुस्तिका का प्रकाशन करना ।

१८. क्षेत्रोंका संगठन, क्षेत्रीय समितियों का निर्माण एवं उनके सक्रियता लाना ।

१९. सनातन धर्म मंदिर के हितों की सुरक्षा का प्रबन्धन ।

२०. केंद्रीय एवं क्षेत्रीय स्तरों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन ।

२१. सनातन धर्म के मंदिरों में पूजा अर्चना की विधि एवं समय में एकरूपता लाना ।

२२. समय-समय पर सनातन धर्म-उपयोगी सामग्री प्रकाशित करना ।

२३. सभाओं एवं मन्दिरों का एक डेटा बैंक  को तैयार करना तथा कथा वाचक/प्रवचनकर्ता/धर्मप्रचारक एवं अर्चकों की व्यवस्था करना ।

२४. तीर्थों एवं धार्मिक यात्राओं की व्यवस्था करना ।

२५. किशोरों एवं युवकों में अच्छे संस्कार हेतु कार्यक्रम आयोजित करना – विशेषकर योग, गीता रामायण की शिक्षा ।

२६. गौरक्षा एवं पंच ग्रन्थ का प्रचार हेतु सम्मेलन आयोजन करना ।

२७. मातृ शक्ति को संगठित करने हेतु सम्मेलन आयोजित करना ।

२८. विदेशों में बेस प्रवासी हिन्दुओं से सम्पर्क कर वहां के श्री सनातन धर्म मन्दिरों को जोड़ना-तथा भारत भर्मण-तीर्थ दर्शन का प्रबन्ध करना ।