प्रार्थना कैसे करे?

प्रार्थना एक धार्मिक क्रिया है जो ब्रह्माण्ड के किसी ‘महान शक्ति’ से सम्बन्ध जोड़ने की कोशिश करती है। प्रार्थना व्यक्तिगत हो सकती है और सामूहिक भी। इसमें शब्दों (मंत्र, गीत आदि) का प्रयोग हो सकता है या प्रार्थना मौन भी हो सकती है।

जब आप भगवान के मंदिर में जाओ तो कहना कि, “हे भगवान आप मेरे अंदर बिराजमान है’, लेकिन क्यों कि अभी तक मुझे मेरे उस स्वरूप का अनुभव नहीं हुआ है इसलिए मैं आपके स्वरूप का दर्शन कर रहा हूँ। ज्ञानीपुरुष दादा भगवान ने मुझे यह सिखाया है और उसी अनुसार मैं आपके दर्शन कर रहा हूँ। हे भगवान मुझ पर अपनी कृपा उतारिए, ताकि मैं भी अपने सच्चे स्वरूप को पहचान सकूँ”। आप कहीं भी किसी भी मंदिर में जाएँ, वहाँ पर आप इसी प्रकार से दर्शन करें। रिलेटीव दृष्टि से सभी भगवानों को अलग-अलग नाम दिए गए है, लेकिन रियल दृष्टि से वे सभी एक ही है।

लोग मंदिर की ओर जाते हुए  भगवान का ध्यान नहीं करते, वे तो अपने नौकरी-धंधे के बारे में ही सोचते रहते हैं। कुछ लोग तो आदतन ही मंदिर जाते हैं। क्या आप दर्शन करने इसलिए जाते हैं, कि यह आपकी आदत बन चुकी है? हर रोज़ भगवान के नए ही दर्शन होने चाहिए और हर रोज़ नया उत्साह, और नया आनंद होना चाहिए।