श्री सनातन धर्म मंदिरो के लिए दिशानिर्देश

१. श्री मन्दिर परिसर से स्वछता पर विशेष ध्यान दे । इस कार्य हेतु वेतनधारी कर्मचारी ( सेवक) भी रखना पड़े तो भी संकोच न करे ।

२. श्री मन्दिर में स्थापित प्रतिमाओं के वस्त्र पोशाक आदि साफ तथा सुन्दर रखें, अधिक से अधिक 15 दिन के पश्चात वस्त्र बदल दें ।

३. भगवान की मूर्तियों के पूजनीय धातु विग्रहों का स्नान, पूजन आदि नित्य प्रात: पुजारियों से करायें । आरती दो बार प्रात: तथा  सायं  अवश्य करायें । आरती से पूर्व  शंकनाद  हो और  समस्त दिल्ली में प्रात : तथा  सायं  शंखनाद  का समय  एक ही  हो ।

४. मन्दिर के खुले रहने का समय 16 मार्च से 15 अक्टूबर तक प्रात: 00 से 12 तक सांय 4.30 से रात्रि 10 बजे तक एवं 16 अक्टूबर से 15 मार्च तक प्रात: 5.30 से 12 बजे तक सांय 4.00 से 10 बजे तक रखें ।

५. दोपहर को राजभोग मध्याह्न 30 बजे तथा रात्रि दुग्ध भोग 10 बजे ।

६. पूरी अवधि तक गद्दी पर पुजारियों का बैठना सुनिश्चित करें ताकि भक्तजनों को चरणामृत, प्रसाद आदि करने में कठिनाई न हो ।

७. मन्दिर के पुजारी साफ सुथरे भारतीय परिधान (कुर्ते-धोती) में हो तथा स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें ।

८. मन्दिर में साफ सुथरे जल का प्रबन्ध रखें ।

९. पटुकाएँ रखने का उचित प्रबंध अनिवार्य है ।

१०. मन्दिर में मुख्य धर्मिक पर्वो पर प्रवचन, सत्संग तथा कथाओ का आयोजन हों ।

११. समाज सेवा के कार्य जैसे – निशुल्क औषधालय, योग केंद्र, संयोग केंद्र, पुस्तकालय इत्यादि स्थापित हों तो लोगों की भागीदारी बढ़ेगी ।

१२. मुख्य पर्व जैसे शिवरात्रि, रामनवमी, कृष्णजन्माष्टमी, नवरात्र, दीपावली, दशहरा आदि श्री सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा दिल्ली दूारा निर्धारित की गई तिथियों पर ही मनायें ताकि एकरूपता बानी रहे ।

१३. समुचित मानदेय (दक्षिणा राशि) लेने वाले योग्य कथा वाचक प्रतिनिधि सभा उपलब्ध कराती है ।

१४. पुजारियों एवं सेवकों हेतु भी प्रतिनिधि सभा सहयोग करती है ।

१५. ग्रीष्म आकाश (मई – जून माह ) में बालकों / बालिकाओं हेतु योग एवं धर्म शिक्षा शिबिरों के आयोजन का प्रबन्ध भी प्रतिनिधि सभा करती है । ये शिविर 10 से 15 दिन के प्रात: अथवा सायं मन्दिर परिसर में हों । अथवा समीप के पार्क में हों ।

१६. पुजारियों/अर्चकों आदि के प्रशिक्षण का भी प्रबन्ध शिविरों के माध्यम से प्रतिनिधि सभा कराती है ।

१७. श्रध्दालुओं एवं भक्तों हेतु विशेष उत्सवों पर हरीदूार, मथुरा आदि तीर्थ स्थानों पर ले जाने का प्रबन्ध करें ।


 

अंत में सभी सनातन धर्म सभाओं/मन्दिरों  से विनम्र अनुरोध है की मात्र 1500/- रूपये देकर श्री सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा के वार्षिक सदस्य बनें तथा सनातन धर्म के समक्ष उपस्थित वर्तमान चुनौतियों का संगठित रूप से सामना करें । उस राशि में सनातन सन्देश का वार्षिक शुल्क भी सम्मिलित है । अधिक जानकारी हेतु दूरभाष अथवा कार्यालय में सम्पर्क करें ।